वार्म ऑटोइम्यून हेमोलिटिक एनीमिया
ICD-10 D59.1 · ICD-11 3A20.0

वार्म ऑटोइम्यून हेमोलिटिक एनीमिया: जब कॉर्टिकोस्टेरॉइड थेरेपी से हीमोग्लोबिन स्थिर नहीं हुआ तो क्या करें

नैदानिक परिदृश्य

यह प्रोटोकॉल वार्म ऑटोइम्यून हेमोलिटिक एनीमिया के उन रोगियों पर लागू होता है जिन्होंने प्रारंभिक कॉर्टिकोस्टेरॉइड उपचार करवाया है, लेकिन आवश्यक हीमोग्लोबिन लक्ष्य प्राप्त नहीं कर पाए — या उसे बनाए नहीं रख पाए — और हेमोलिसिस के निरंतर प्रमाण मौजूद हैं।

पूर्व उपचार और विफलता की स्थिति

पूर्व उपचार योजना प्रेडनिसोन पर आधारित थी। अपेक्षित परिणाम 10 g/dL से ऊपर स्थिर हीमोग्लोबिन, हीमोग्लोबिन में निरंतर वृद्धि और लक्षणों का समाधान था। जब ये लक्ष्य प्राप्त नहीं होते, या स्वीकार्य रूप से कम कॉर्टिकोस्टेरॉइड खुराक पर बनाए नहीं रखे जा सकते, तो इस अगली-पंक्ति प्रोटोकॉल पर जाना उचित है।

अगले चरण का उपचार दृष्टिकोण

अगले चरण में एक लक्षित जैविक एजेंट — रिटक्सिमैब — शामिल किया जाता है, जिसे कॉर्टिकोस्टेरॉइड कोर्स को धीरे-धीरे कम करते हुए दिया जाता है। सटीक अनुसूची, समय और अनुक्रम पूर्ण प्रोटोकॉल में विस्तार से दिया गया है।

उपचार के लक्ष्य

हीमोग्लोबिन का सामान्यीकरण, चल रहे हेमोलिसिस का कोई प्रमाण नहीं — जो सामान्य बिलीरुबिन, LDH, हैप्टोग्लोबिन और रेटिकुलोसाइट स्तरों से परिलक्षित होता है।

संरचित साक्ष्य-आधारित उपचार योजनाओं तक तत्काल पहुंच

References

DOI: 10.1182/hematology.2022000405

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