मूत्र पथ का तपेदिक
ICD-10 A18.1; N33.0 · ICD-11 1B12.5

मूत्रवाहिनी संकुचन और जलवृक्कता के साथ मूत्र पथ तपेदिक का उपचार

यह प्रोटोकॉल तपेदिक से उत्पन्न मूत्रवाहिनी (मूत्र पथ) संकुचन के प्रबंधन को कवर करता है, जहाँ अवरोध से जलवृक्कता होती है और वृक्क कार्य को खतरा होता है।

नैदानिक परिदृश्य

तपेदिक के कारण मूत्रवाहिनी संकुचन से प्रगतिशील अवरोध और जलवृक्कता होती है। जब वृक्क कार्य को संरक्षित करना आवश्यक हो, तो औषधीय उपचार शुरू करने से पहले — डबल-जे कैथेटर या नेफ्रोस्टॉमी के माध्यम से — प्रारंभिक मूत्र विमोचन का संकेत होता है।

शल्य चिकित्सा दृष्टिकोण (आंशिक अवलोकन)

जब एंडोस्कोपिक प्रबंधन संभव नहीं है या विफल हो गया है, तो पुनर्निर्माण शल्य चिकित्सा — खुली, लैप्रोस्कोपिक, या रोबोटिक — का संकेत होता है। पूर्ण प्रोटोकॉल यह निर्दिष्ट करता है कि मूत्रवाहिनी संलग्नता के स्थान और सीमा के आधार पर कौन सी तकनीक लागू होती है।

संपूर्ण तकनीक चयन एल्गोरिदम, मूत्रवाहिनी खंड द्वारा संकेत, और पूर्ण संरचित पद्धति नीचे दिए गए प्रोटोकॉल में उपलब्ध है।

संरचित साक्ष्य-आधारित पद्धतियों तक तत्काल पहुंच

References

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