अघातज एपिड्यूरल रक्तस्राव का उपचार क्या है?
अघातज एपिड्यूरल रक्तस्राव (IEH) में बिना किसी आघातजन्य कारण के एपिड्यूरल स्थान में रक्त का संचय होता है। नैदानिक प्राथमिकता हेमाटोमा को निकालना और पुनरावृत्ति को रोकना है, जिसके लिए चुनी गई विधि व्यक्तिगत रोगी कारकों और हेमाटोमा की विशेषताओं पर निर्भर करती है।
प्रबंधन इस बात पर निर्भर करता है कि पारंपरिक शल्य-चिकित्सा हस्तक्षेप संभव है या नहीं। जब शल्य-चिकित्सा उचित हो, तो लक्ष्य सीधा निष्कासन और निश्चित वाहिका नियंत्रण है। जब यह संभव न हो — उदाहरण के लिए सहवर्ती रोग या विशिष्ट हेमाटोमा विशेषताओं के कारण — तो एक वैकल्पिक एंडोवास्कुलर दृष्टिकोण अपनाया जा सकता है।
उपचार दृष्टिकोण
प्राथमिक विधि शल्य-चिकित्सा है, जिसमें सीधे निष्कासन और हेमोस्टेसिस प्राप्त करने के लिए हेमाटोमा स्थल के ऊपर क्रेनियोटॉमी शामिल है। जिन मामलों में पारंपरिक शल्य-चिकित्सा उचित नहीं है, वहाँ एक विशिष्ट अंतःकपालीय धमनी पर निर्देशित लक्षित एंडोवास्कुलर प्रक्रिया एक स्थापित विकल्प है। पूर्ण प्रक्रियात्मक अनुक्रम, शल्य विवरण और निर्णय मानदंड पूर्ण प्रोटोकॉल में उपलब्ध हैं।
पूर्ण नियमावली — प्रक्रियात्मक चरणों और रोगी चयन मानदंडों सहित — नीचे दिए गए लिंक के माध्यम से उपलब्ध है।
References
DOI: 10.1055/s-0044-1796652
- Surgical treatment is performed through osteoplastic craniotomy above the site of the hematoma, with coagulation of the lacerated vessel always necessary.
- Dura mater suturing at the edges of the craniotomy and in the center of the bone flap to prevent its recurrence.
- The recommended treatment for IEH is osteoplastic craniotomy and hematoma drainage with replacement of the bone flap.
- Middle meningeal artery embolization plays a crucial role as an alternative treatment, particularly in certain coexisting disease scenarios where conventional surgical treatment of IEH is precluded.
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