जब अन्य हस्तक्षेप विफल हो जाएं तो मैलोरी-वेइस सिंड्रोम का शल्य चिकित्सा उपचार
मैलोरी-वेइस सिंड्रोम में गैस्ट्रिक कार्डिया पर श्लेष्म झिल्ली की दरार होती है, जो सामान्यतः ऊपरी जठरांत्र रक्तस्राव के रूप में प्रकट होती है। कुछ रोगियों में, प्रारंभिक प्रबंधन रणनीतियाँ स्थायी हीमोस्टेसिस प्राप्त नहीं कर पाती हैं, और शल्य चिकित्सा दृष्टिकोण आवश्यक हो जाता है।
नैदानिक स्थिति
यह प्रोटोकॉल उन मामलों को संबोधित करता है जहाँ एंडोस्कोपिक या एंजियोग्राफिक हस्तक्षेप रक्तस्राव को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त नहीं रहे हैं। शल्य चिकित्सा को अंतिम निश्चित उपाय के रूप में तब आरक्षित किया जाता है जब कम आक्रामक विकल्प समाप्त हो जाते हैं।
दृष्टिकोण — आंशिक अवलोकन
प्रबंधन में गैस्ट्रिक कार्डिया पर दरार की सीधी शल्य चिकित्सा मरम्मत शामिल है। विशिष्ट तकनीक — चाहे खुली हो या न्यूनतम आक्रामक — और पूर्ण प्रक्रियात्मक एल्गोरिदम संरचित प्रोटोकॉल में विस्तृत है।
References
DOI: 10.30574/gscarr.2025.23.3.0177
- Surgery is rarely required and is considered a last resort following failed endoscopic or angiographic interventions.
- If no duodenal or gastric lesions are found, a wide gastrostomy is performed via laparotomy.
- Mallory-Weiss lacerations at the gastric cardia are readily visible and can be repaired using running catgut sutures.
- Endoscopy-guided laparoscopic suturing of the tear has demonstrated excellent outcomes.
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