हिर्शस्प्रुंग रोग कार्यात्मक आंत्र अवरोध उत्पन्न करता है जिसे निश्चित शल्य-चिकित्सा सुधार से पहले की अवधि में सक्रिय रूप से प्रबंधित किया जाना आवश्यक है। प्राथमिक लक्ष्य पुल-थ्रू ऑपरेशन तक रोगी को सुरक्षित और प्रभावी रूप से आंत्र विसंपीड़न द्वारा तैयार करना है।
रोगी को हिर्शस्प्रुंग रोग के साथ कार्यात्मक आंत्र अवरोध है। निश्चित पुल-थ्रू प्रक्रिया से पहले, प्री-ऑपरेटिव अवधि के दौरान प्रबंधन आवश्यक है।
प्रबंधन में शारीरिक सेलाइन का उपयोग करके एक विशिष्ट रेक्टल इरिगेशन तकनीक शामिल है, जो आंत्र विसंपीड़न प्राप्त करने और बनाए रखने के लिए नियमित दैनिक कार्यक्रम पर की जाती है। पूर्ण प्रोटोकॉल — जिसमें आवृत्ति, तकनीकी विवरण और जारी रखने के मानदंड शामिल हैं — नीचे दिए गए संरचित नियम के माध्यम से उपलब्ध है।
DOI: 10.1186/s13023-020-01362-3