दवा-प्रेरित यकृत क्षति (DILI) का अनुभव करने वाले कुछ रोगियों में एक स्थायी कोलेस्टेटिक पैटर्न विकसित होता है, जो हानिकारक दवा बंद करने के बाद भी पूरी तरह ठीक नहीं होता। इस क्रोनिक कोलेस्टेटिक प्रस्तुति के लिए एक विशिष्ट उपचार दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है।
यह प्रोटोकॉल उन रोगियों के लिए है जिनमें DILI के बाद क्रोनिक कोलेस्टेसिस होता है — जहाँ तीव्र दवा-प्रेरित यकृत क्षति की घटना के बाद भी कोलेस्टेटिक शिथिलता बनी रहती है। इस चल रही स्थिति का समाधान करना यकृत को और अधिक नुकसान से बचाने के लिए आवश्यक है।
इस संदर्भ में क्रोनिक कोलेस्टेसिस का प्रबंधन एक पित्त अम्ल एजेंट पर केंद्रित है — ursodeoxycholic acid (UDCA) इस दृष्टिकोण का आधार बनता है। सम्पूर्ण प्रोटोकॉल में पूर्ण उपचार पद्धति की संरचना, खुराक के मापदंड और यहाँ उल्लिखित से परे निगरानी संबंधी मार्गदर्शन निर्दिष्ट है।
DOI: 10.1016/j.jhep.2019.02.014
Chronic cholestasis following DILI is often treated with ursodeoxycholic acid (UDCA).
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