18 वर्ष से कम बच्चों में क्रोनिक किडनी रोग का एनीमिया जब ESA थेरेपी विफल हो गई हो
एनीमिया और क्रोनिक किडनी रोग से पीड़ित 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों में, एरिथ्रोपोइसिस-उत्तेजक एजेंट (ESA) स्थापित प्रथम-पंक्ति उपचार हैं। जब ESA थेरेपी अपेक्षित हीमोग्लोबिन प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं कर पाती, तो एक संरचित अनुवर्ती प्रोटोकॉल अगले नैदानिक चरण का मार्गदर्शन करता है।
नैदानिक परिदृश्य
क्रोनिक किडनी रोग के संदर्भ में एनीमिया से पीड़ित 18 वर्ष से कम आयु का रोगी। ESA इस बाल चिकित्सा आबादी में प्रभावी हैं और प्रारंभिक प्रबंधन का आधार बनाते हैं; तथापि, ऐसे मामलों के लिए एक परिभाषित उन्नयन मार्ग मौजूद है जहाँ प्रथम-पंक्ति ESA थेरेपी अपर्याप्त हो।
पूर्व उपचार पंक्ति — उन्नयन क्यों आवश्यक हो जाता है
पूर्व उपचार: एरिथ्रोपोइसिस-उत्तेजक एजेंट (ESA) प्रथम-पंक्ति थेरेपी के रूप में — जिसमें एपोइटिन अल्फा/बीटा, डार्बेपोइटिन, मेथिल पॉलीएथिलीन ग्लाइकोल–एपोइटिन बीटा, या ESA बायोसिमिलर शामिल हैं।
लक्ष्य पूरे नहीं हुए: प्रति माह 1.0 g/dl की हीमोग्लोबिन वृद्धि प्राप्त नहीं हुई, या व्यक्तिगत रखरखाव हीमोग्लोबिन लक्ष्य नहीं पहुँचा गया। इन हीमोग्लोबिन लक्ष्यों को पूरा न कर पाना वह स्थिति है जो देखभाल को इस अगली-पंक्ति प्रोटोकॉल तक उन्नत करती है।
अगले-चरण का दृष्टिकोण — आंशिक अवलोकन
इस प्रोटोकॉल में ESA थेरेपी के अप्रभावी साबित होने पर व्यापक प्रबंधन के भाग के रूप में लाल रक्त कोशिका आधान-आधारित रणनीति शामिल है। इस दृष्टिकोण में उन बच्चों से संबंधित विशिष्ट नैदानिक विचार शामिल हैं जो किडनी प्रत्यारोपण के उम्मीदवार हो सकते हैं। पूर्ण निर्णय ढाँचा — जिसमें यह रणनीति कब और कैसे लागू की जाती है — पूर्ण प्रोटोकॉल में उपलब्ध है।
References
DOI: 10.1016/j.kint.2025.06.006
- ESAs are effective in children, while HIF-PHIs have not been studied in children.
- There are insufficient data for efficacy and safety regarding the use of HIF-PHIs for the treatment of children with anemia and CKD G5D or CKD not receiving dialysis.
- In people with anemia and CKD, base the decision to transfuse on symptoms and signs caused by anemia rather than an arbitrary Hb threshold.
- In people with anemia and CKD eligible for organ transplantation, avoid, when possible, RBC transfusions to minimize the risk of allosensitization.
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