क्रॉनिक रोग की एनीमिया: जब IV आयरन थेरेपी आयरन की कमी को ठीक नहीं कर पाई तो अगला कदम
जब IV आयरन थेरेपी क्रॉनिक रोग की एनीमिया (AI) से पीड़ित किसी रोगी में आयरन की कमी का सफल सुधार करने में विफल रहती है, तो एक संरचित अगली पंक्ति का दृष्टिकोण अपनाया जाता है। आयरन थेरेपी के प्रति कोई प्रतिक्रिया न होना AI के निदान का समर्थन करता है और एक अलग वर्ग के हस्तक्षेप की ओर इशारा करता है।
पूर्व पंक्ति — IV आयरन थेरेपी अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंची
पिछले उपचार चरण में IV आयरन थेरेपी शामिल थी — जिसमें पुरानी संरचनाएं जैसे फेरिक ग्लूकोनेट या फेरिक सुक्रोज, साथ ही नई ग्लाइकन-लेपित नैनोपार्टिकल संरचनाएं जैसे आयरन कार्बोक्सीमाल्टोज, आयरन आइसोमाल्टोसाइड और फेरुमोक्सिटोल शामिल हैं। उस पंक्ति का लक्ष्य आयरन की कमी का सफल सुधार था। जब वह लक्ष्य प्राप्त नहीं होता, तो उपचार को आगे बढ़ाना आवश्यक हो जाता है।
अगली पंक्ति का उपचार दृष्टिकोण
AI के लिए अगली पंक्ति की उपचार योजना में एरिथ्रोपोइसिस-उत्तेजक एजेंट (ESA) थेरेपी शामिल है। रिकॉम्बिनेंट ह्यूमन ESAs का उपयोग इस स्थिति में AI के उपचार के लिए किया गया है — संपूर्ण संयोजन, अनुक्रमण और नैदानिक विचार पूर्ण प्रोटोकॉल में शामिल हैं।
उपचार का लक्ष्य
इस चरण में नैदानिक उद्देश्य हीमोग्लोबिन में वृद्धि के साथ एनीमिया में सुधार है।
References
DOI: 10.1016/j.kint.2025.06.006
- No response to iron therapy would support the diagnosis of AI, suggesting that ESA therapy may be beneficial.
- Recombinant human ESAs have been used successfully for the treatment of AI for many years, specifically in patients with cancer or renal failure or when iron supplementation alone was ineffective.
- In addition to treatment of the disease underlying AI, the combination of iron therapy and erythropoiesis-stimulating agents can improve anemia in many patients.