ग्रुप A बीटा-हेमोलिटिक स्ट्रेप्टोकोकस (GABHS) तीव्र फैरिंजाइटिस का एक सामान्य जीवाणु कारण है। जब किसी रोगी को पेनिसिलिन या अन्य बीटा-लैक्टम एंटीबायोटिक्स से पुष्टि या संदिग्ध एलर्जी होती है, तो सामान्य प्रथम-पंक्ति दवाएं वर्जित होती हैं और एक वैकल्पिक वर्ग का चयन करना आवश्यक हो जाता है।
यह प्रोटोकॉल विशेष रूप से उन रोगियों में GABHS के कारण होने वाले तीव्र फैरिंजाइटिस को संबोधित करता है जिन्हें पेनिसिलिन या बीटा-लैक्टम एंटीबायोटिक्स से पुष्टि या संदिग्ध एलर्जी है। एलर्जी की स्थिति ही वह निर्धारक कारक है जो इस रोगी समूह में एंटीबायोटिक चयन को आकार देती है।
जब बीटा-लैक्टम एलर्जी मौजूद हो, तो एंटीबायोटिक उपचार वैकल्पिक वर्गों पर निर्भर करता है — मैक्रोलाइड्स (प्रतिरोध पैटर्न के कारण विशिष्ट मैक्रोलाइड उप-प्रकार पर विशेष ध्यान देते हुए) और लिन्कोसामाइड एंटीबायोटिक्स। दवा और उपचार अवधि का पूर्ण चयन पूर्ण प्रोटोकॉल में विस्तृत व्यक्तिगत नैदानिक कारकों पर निर्भर करता है।
Macrolides and lincosamides (clindamycin) are considered the treatment of choice in patients who are allergic, or suspected to be allergic, to β-lactam antibiotics.
If there is confirmed allergy to penicillin, it is advised that clindamycin 300 mg/8 h is used for 10 days or a 16-atom macrolide such as josamycin 1 g/12 h for 10 days, since GABHS resistance, although it has decreased in recent years, remains greater to 14 and 15-atom macrolides than to 16-atom macrolides.
Diacetylmidecamycin 600 mg/12 h 10 days
DOI: 10.1016/j.otoeng.2015.05.003
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