एसिटामिनोफेन (पैरासिटामोल) का अधिमात्रा सेवन तीव्र दवा-प्रेरित यकृत चोट का एक मान्यता प्राप्त कारण है। यकृत संलग्नता की गंभीरता जैव-रासायनिक असामान्यताओं से लेकर नैदानिक रूप से महत्वपूर्ण अंग शिथिलता तक हो सकती है, जिससे त्वरित, प्रोटोकॉल-आधारित प्रबंधन आवश्यक हो जाता है।
जब कोई रोगी स्थापित यकृत चोट के लक्षणों के साथ उपस्थित होता है — जैसे कि कोगुलोपैथी या ऊंचे सीरम ट्रांसएमिनेस — तो उचित हस्तक्षेप शुरू करने की तात्कालिकता काफी बढ़ जाती है।
प्रबंधन एक विशिष्ट प्रतिविषाक्त चिकित्सा पर केंद्रित है जिसका समय-संवेदनशील प्रभावकारिता प्रोफ़ाइल सुपरिभाषित है। साक्ष्य दर्शाते हैं कि उपचार अधिमात्रा के तुरंत बाद प्रारंभ करने पर और बाद के चरण में — विशेष रूप से उन रोगियों में जिनमें यकृत या अंग शिथिलता के लक्षण पहले से विकसित हो चुके हैं — दोनों स्थितियों में लाभ होता है।
पूर्ण उपचार क्रम — जिसमें प्रशासन मार्ग, खुराक अनुसूची और अवधि सीमाएं शामिल हैं — पूर्ण संरचित प्रोटोकॉल में विस्तृत है।
DOI: 10.1016/j.jhep.2016.12.003